देवनागरी में लिखें

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Tuesday, 13 December 2011

" गुस्सा , गुस्सा और गुस्सा "


एक डिब्बा , जिसमें गुड़ था.... !
जो ससुर रोज खाते थे.... !! J
सास  , उस डिब्बे को रोज खाली , करने के लिए बोलतीं.... ! L
लेकिन , “ बहु “ के पास ,दूसरा डिब्बा नहीं होगा , L
या , सोचती होगी , “ ससुर “ ,
जब गुड़ खा लेगें , डिब्बा खाली हो जाएगा.... !! J
“ सास “ , एक दिन ,स्वयं चौकाँ(किचेन) में गईं ,
“ औदौड़ी “ वाले डिब्बा खाली कर ,
डिब्बा में , गुड़ रख दीं.... ! J
इतना गुस्सा आया , न जाने क्यों , 
गुड़ वाले डिब्बा को टुकडा - टुकडा कर दीं.... ?? L
“ बहु “ को गुस्सा आया.... ! L
औदौड़ी , रखने के लिए  ,दुसरा डिब्बा नहीं मिला ,
उसने , औदौड़ी फेकं दी.... !! अपना नुक्सान की....  J
“ ससुर “, को गुस्सा आया , बोलें , 
“ बहु “ को जूता से मार कर ,
घर से बाहर निकाल देगें.... ! L

17 comments:

रश्मि प्रभा... said...

mann ki baukhlahat shabdon mein hai...jise mahsoos karti jaa rahi hun

डॉ॰ मोनिका शर्मा said...

Gusse ki pratikriya bhi gussa hi hota hai....

संजय भास्कर said...

वाह. रचा है आपने....
आनंद आ गया पढ़कर

dheerendra said...

विभा जी,..गुस्से के बदले गुस्सा ही होता है,.जैसी करनी वैसी भरनी..

मेरी नई पोस्ट की चंद लाइनें पेश है....

जहर इन्हीं का बोया है, प्रेम-भाव परिपाटी में
घोल दिया बारूद इन्होने, हँसते गाते माटी में,
मस्ती में बौराये नेता, चमचे लगे दलाली में
रख छूरी जनता के,अफसर मस्ती के लाली में,

पूरी रचना पढ़ने के लिए काव्यान्जलि मे click करे

Maheshwari kaneri said...

गुस्से का अंत गस्सा ही होता है...मेरी नई पोस्ट में आप का स्वागत है..

दिगम्बर नासवा said...

पर ये गुस्सा काहे का ... कारण समझना जरूरी है हर गुस्से में ...

Kailash Sharma said...

बहुत खूब! गुस्से का परिणाम गुस्सा ही होता है लेकिन अंत में उससे नुकसान ही होता है...

सदा said...

इस गुस्‍से को शब्‍दों में बखूबी उतारा है ... ।

S.N SHUKLA said...

सुन्दर रचना, आभार

मेरे ब्लॉग पर भी पधार कर अनुगृहीत करें.

प्रेम सरोवर said...

आपकी प्रस्तुति अच्छी लगी । मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है । धन्यवाद ।

प्रेम सरोवर said...

मेरे नए पोस्ट उपेंद्र नाथ अश्क पर आपके प्रतिक्रियाओं की आतुरता से प्रतीक्षा रहेगी । धन्यवाद ।

प्रेम सरोवर said...

आपका पोस्ट अच्छा लगा । मेरे नए पोस्ट उपेंद्र नाथ अश्क पर आपके प्रतिक्रियाओं की आतुरता से प्रतीक्षा रहेगी । धन्यवाद ।

Naveen Mani Tripathi said...

bahut achha likha hai apne .... bahut bahut abhar.. mere blog pr apka swagat hai.

प्रेम सरोवर said...

प्रस्तुति अच्छी लगी । मेरे नए पोस्ट पर आप आमंत्रित हैं । धन्यवाद ।

भावना said...

gusaa hum sab me hota hai...aksar kahi ka kahin nikalta hai..aur hamesha apna hi nuksaan ho jata hai:(

Sanju said...

बहुत बेहतरीन....

Naveen Mani Tripathi said...

sundar aur prabhavshali prastuti ke liye abhar