देवनागरी में लिखें

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Friday, 19 April 2013

कब तक ?


कब तक ?
कब तक हम कागज़ काला करते रहेंगे ....
आखिर कब तक देश दहलता रहेगा ....
कब तक वे गाल बजाते रहेंगे .....
कौन जबाब देगा ....
कौन बताएगा ...
पाँच साल की बच्ची क्या पोशाक पहनी थी कि वो हवश की शिकार हुई
किस बॉय फ्रेंड के साथ देर रात को अय्यासी कर रही थी
कौन सा अंग आकर्षित किया कि उसके प्राइवेट पार्ट में 200ml का बोतल
और एक मोमबत्ती डालने की ललक पैदा हुई .....
???????????
बहुत मांग चुकी कड़ी-से कड़ी सज़ा
फांसी की सज़ा
अब तो एक ही मांग
बदला ऐसा जो रूह कापे
काट डालो प्राइवेट पार्ट क्यूँ कि  उसने ऐसा ही कुकर्म किया
फोड़ डालो दोनों आँखें
आंखो की ही खता थी
काट डालो दोनों हांथ उसी से पकड़ा होगा
छोड़ दो ,छोड़ दो बिलबिलाने के लिए सड़कों पर
उसके शरीर में कीड़े पड़े .........

3 comments:

प्रसन्न वदन चतुर्वेदी said...

वाह... उम्दा, बेहतरीन अभिव्यक्ति...बहुत बहुत बधाई...

कवि किशोर कुमार खोरेन्द्र said...

akrosh ki sahi abhivykti ..chahte sabhi hai aesa hi ho ..

Asha Joglekar said...

सही कहा ऐसी ही हो सज़ा।