देवनागरी में लिखें

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Monday, 11 March 2013

हौसले





दुःख के बादल हैं मँडाराते ,
आंसुओं में पिघल जाने के लिए ....
कई मुश्किलें हैं विचलाते ,
हौसले आज़माने के लिए ....
उलझनों में ना हैं ,उलझते ,
लड़ते हैं ,सुलझाने के लिए ....
पतझड़ -अंधेरो से नहीं हैं घबराते ,
जिंदगी मिली है ,नहीं खोने के लिए ....




12 comments:

अभिषेक कुमार झा अभी said...

Waah Waah........... Bahut Khoob
Didi Kuchh Swrachit Pankttiyan YAAD aa Gayi :-
''Jindagi Mili Hai, To ZindaDili Se Jeeunga,
E Andhera Tu Mujhe, Ab Kya Darayega''.

तुषार राज रस्तोगी said...

वाह अम्मा बहुत बढ़िया लिखा आपने | सादर

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया said...

हौसला रखने वाले जीवन में कामयाब होते है,,

Recent post: रंग गुलाल है यारो,

Akhtar Kidwai said...

जिंदगी मिली है ,नहीं खोने के लिए ....beahd umda likha aap ne

रश्मि प्रभा... said...

हौसले आर्तनाद भी करते हैं ... अपनी चीखों की प्रतिध्वनि की शून्यता में अपनी पूरी जन्दगी का हिसाब किताब करते हैं

सदा said...

वाह ... क्‍या बात है
इन हौसलों को सलाम ...
सादर

Kuldeep Sing said...

जो लोग जिंदगी से निराश हो चुके हों उन मुझ जैसे कई लोगों को संदेश देती रचना...

Kuldeep Sing said...

आप की ये सुंदर रचना शुकरवार यानी 22-03-2013 की नई पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही है...
आप भी इस हलचल में शामिल होकर इस की शोभा बढ़ाएं।
आप के सुझावों का स्वागत है। आप से मेरा निवेदन है कि आप भी इस हलचल में आकर इसकी शोभा बढ़ाएं...
सूचनार्थ।

Anupama Tripathi said...

पतझड़ -अंधेरो से नहीं हैं घबराते ,
जिंदगी मिली है ,नहीं खोने के लिए ....

बहुत सुन्दर एवं सार्थक भी ...!!

expression said...

वाह....
सुन्दर अभिव्यक्ति....
सार्थक भाव..

सादर
अनु

Dr.NISHA MAHARANA said...

कई मुश्किलें हैं विचलाते ,
हौसले आज़माने के लिए ..pate ki bat ....

विजय राज बली माथुर said...

होली मुबारक

अभी 'प्रहलाद' नहीं हुआ है अर्थात प्रजा का आह्लाद नहीं हुआ है.आह्लाद -खुशी -प्रसन्नता जनता को नसीब नहीं है.करों के भार से ,अपहरण -बलात्कार से,चोरी-डकैती ,लूट-मार से,जनता त्राही-त्राही कर रही है.आज फिर आवश्यकता है -'वराह अवतार' की .वराह=वर+अह =वर यानि अच्छा और अह यानी दिन .इस प्रकार वराह अवतार का मतलब है अच्छा दिन -समय आना.जब जनता जागरूक हो जाती है तो अच्छा समय (दिन) आता है और तभी 'प्रहलाद' का जन्म होता है अर्थात प्रजा का आह्लाद होता है =प्रजा की खुशी होती है.ऐसा होने पर ही हिरण्याक्ष तथा हिरण्य कश्यप का अंत हो जाता है अर्थात शोषण और उत्पीडन समाप्त हो जाता है.